Tuesday, February 24, 2009

M.C.X. WEEKLY WEAK-UP CALL

सोने का भाव 16000 के लग भाग चल रहा है और मुझे लग रहा है की जल ही हम एक साप्ताहिक नया लो बनतें देख सकेगे इस संकिशा के विषय पर प्रतिरोध हो सकता है क्यो की इस बार के टारगेट केवल पेड ग्राहकों के लिए ही है | गौरव भाटी 9214413717

Monday, January 26, 2009

सोने की साप्ताहिक समीक्षा

ऍम सी एक्स पर सोना इस समय लगभग 14000के आस पास चल रहा है और मुझे लगता है की जल्द ही हमें एक नया हाई देख ने को मिल सकता है, पिछली बार जब यह भाव लगभग 13000 के आस पास था तब मैने अपने इंलिश समीक्षा में यह लिखा था की हमें जल्द ही नया हाई देख ने को मिल जाएगा और हुआ भी वेसा ही । यह तेजी थम ने में अभी वक्त लग सकता है मुझे लग रहा है की हम जल्द ही 18000से 20000 के बीचका भाव देखेगे, नोट :- भावः नीचे आने की के समय खरीदना फायदे का सौदा रहेगा अधिक, जानकारी के लिए आप मुझे मेरे नम्बर पर संपर्क कर सकते है -9214413717 गौरव भाटी

Friday, August 22, 2008

सुजलॉन एनर्जी ने कच्चे माल की आत्मनिर्भरता.......

सुजलॉन एनर्जी : सुजलॉन एनर्जी ने कच्चे माल की आत्मनिर्भरता, क्षमता विस्तार और तेजी से विकसित हो रहे बाजारों में मौजूद अवसरों को भुनाकर आने वाले वर्षों में मुनाफे की फसल काटने की स्थितियां बना ली हैं।
दुनिया में बिजली उत्पादन के लिए कोयला और गैस सबसे अहम प्राथमिक स्रोत हैं। इस बारे में सबूत के तौर पर हमारे सामने आंकड़ा यह है कि कुल ऊर्जा उत्पादन का 65 फीसद हिस्सा कोयला एवं गैस आधारित संयंत्रों में ही तैयार किया जाता है।

लेकिन बढ़ती कीमतें, सीमित आपूर्ति और वातावरण संबंधी मसले दुनियाभर को इन स्रोतों से इतर दूसरे वैकल्पिक स्रोत ढूंढने पर मजबूर कर रहे हैं, ताकि भविष्य में लंबे समय तक ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके चलते इस बात पर शायद ही बहुत ज्यादा आश्चर्य हो कि दुनियाभर के देशों के साथ भारत में भी ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों मसलन वायु, सौर एवं अन्य प्रकार के स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन के मद्देनजर वैश्विक स्तर पर सुजलॉन एनर्जी इस अवसर को भुनाती और इससे फायदा उठाती नजर आ रही है जिसका जर्मनी स्थित आरईपावर के साथ गठजोड़ है। सुजलॉन दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी पॉवर साल्यूशन प्रदाता कंपनी मानी जाती है।

कंपनी का पूरी तरह से एकीकृत किस्म का कारोबार है जो परामर्श, साइट के विकास, उनके प्रारूप को तैयार करने से लेकर निर्माण एवं मरम्मत संबंधी सेवाएं भी प्रदान करता है। वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो पवन ऊर्जा का एक बड़ा बाजार है।

कैलेंडर वर्ष 2006 में जहां कंपनी की बाजार में कुल 7.7 फीसदी की हिस्सेदारी थी वहीं यह कैलेंडर वर्ष 2007 में बढ़कर 13.9 फीसदी हो गई है। इतना ही नहीं, भारतीय बाजारों में भी इसकी जबरदस्त पैठ है और यहां उसकी कुल 58 फीसदी हिस्सेदारी है।

तेज विकास एवं क्षमता

कंपनी के राजस्व में हो रहे तेज इजाफे में माकूल औद्योगिक रुख एवं अन्य बाजारों में इसकी विकसित गति की मौजूदगी की झलक देखती है। कंपनी का अधिग्रहण समेत स्थापित कारोबार कुल 91.6 फीसदी के चक्रवृद्धि ब्याज की दर से सालाना के स्तर पर गतिमान है।

यह गति वित्तीय वर्ष 2005 से 2008 के दरम्यान दर्ज की गई है और कुल कारोबार 1,942 करोड़ रुपये से 13,679 करोड़ रुपये का हो गया है। हालांकि कंपनी इसी रफ्तार से ही शायद आगे न बढ़े पर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक स्थापित मौजूदगी के मद्देनजर विकास दर की रफ्तार बेहतर रहनी चाहिए।

खासकर पिछले पांच सालों के दौरान पवन ऊर्जा की क्षमता की बात की जाए तो यह 24 फीसदी के सीएजीआर की दर से बढ़ी है। यह विकास प्राथमिक स्तर पर चीन, भारत, यूरोप एवं अमेरिका जैसे बाजारों से आने वाला है।

राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग (चीन) के मुताबिक वहां 2020 तक पवन ऊर्जा उत्पादन बढ़कर 1 लाख मेगावाट हो जाने की उम्मीद है, जो 2007 में 4,000 मेगावॉट थी। इसी अवधि के दौरान भारत में पवन ऊर्जा उत्पादन का आंकड़ा 45,000 मेगावाट हो जाने की उम्मीद है जो इस वक्त कुल 8,000 मेगावाट है।

बढ़ती पहुंच

इन सब अवसरों को देखते हुए कंपनी ने मौजूं किस्म के कई ऑर्गेनिक एवं इनऑर्गेनिक कदम उठाए हैं, ताकि इसका आपूर्ति संजाल एवं तकनीकी क्षमता को और संवर्द्धित यानी बेहतर किया जा सके।

आत्मनिर्भर एकीकरण

औजारों की समय पर आपूर्ति से लेकर लागत कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सुजलॉन ने हैंसन ट्रांसमिशन जो गियर बॉक्सेज का निर्माण करती है, में 71.3 फीसदी की हिस्सेदारी अधिग्रहीत की है। गियर बॉक्स का इस्तेमाल विंड टरबाइन जेनरेटरों में होता है।

हैंसन भी अपनी क्षमता को 3,600 मेगावाट से बढ़ाकर 14,600 मेगावाट कर रही है। इसके अलावा कंपनी भारत एवं चीन में नए संयंत्र सिंतबर 2008 और सितंबर 2009 में चालू करने जा रही है। इसके अलावा सुजलॉन की भारत में फाउंड्री क्षमताओं को भी स्थापित करने की योजना है।

कंपनी को यह विश्वास है कि इसके इन-हाऊस औजार निर्माण एवं फाउंड्री क्षमताओं की बदौलत इसे डब्ल्यूटीजी की लागत तो कम करने में मदद मिलेगी ही, नई सुविधाओं को वक्त पर या फिर वक्त से पहले लागू भी किया जा सकेगा।

लाभ में स्थिरता

जहां तक मार्जिन का संबंध है तो कमोडिटी कीमतों के बढ़ने के बावजूद सुजलॉन के लाभ पर भी इनका असर कम ही पड़ता प्रतीत हो रहा है। यहां बैकवार्ड इंटीग्रेशन यानी कच्चे माल सहित अन्य चीजों के लिए खुद पर निर्भरता का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि इनकी वजह से बढ़ी हुई कमोडिटी कीमतों का असर उतना नहीं पड़ने वाला है।

वित्तीय वर्ष 2009 की पहली तिमाही की बात करें तो कंपनी ने अपनी कीमतों में इजाफा किया है, पर रुपये के कमजोर होने के कारण इसका रियलाइजेशन बेहतर था। इसी समान अवधि के लिए सेल्स रियलाइजेशन की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2008 की पहली तिमाही के मुकाबले इस कारोबार में इजाफा दर्ज किया गया है।

पिछली बार यह जहां 4.73 करोड़ प्रति मेगावाट था वहीं इस बार यह 6.17 करोड़ मेगावाट के स्तर पर है। कुल मिलाकर विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक कंपनी के 14.1 फीसदी के मौजूदा इबडिटा मार्जिन में मामूली इजाफे की गुंजाइश है।

निवेश की वजह

सुजलॉन के शेयरों की कीमतों में जनवरी 2008 में 52 हफ्तों की ऊंचाई के बाद से कुल 47 फीसदी का अंतर आया है। उस वक्त शेयरों की कीमतें 460 रुपये के स्तर पर थीं जो अब 241 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। ऐसा अमेरिकी मंदी मार्जिन पर दवाब और कुछ ऑर्डरों के खारिज होने की आशंकाओं के मद्देनजर हुई है।

लेकिन कंपनी के आरईपॉवर के साथ गठजोड़ से उसे हाल के दिनों में तकनीक से जुड़ी समस्याओं को हल करने में आसानी होगी। इसके अलावा कंपनी को आगे चलकर वैश्विक एवं घरेलू मांग मजबूत रहने का भरोसा है। कुल मिलाकर इस क्षेत्र में निवेश ज्यादा होने के कारण कंपनी को भी लंबे समय में उम्मीद से बेहतर मुनाफा होना चाहिए।

इसके शेयर वित्तीय वर्ष 2010 के लिए अनुमानित कमाई के मुकाबले तकरीबन 14 गुना पर कारोबार कर रहे हैं। विश्लेषकों की अगर बात की जाए, तो उन्होंने इसके शेयरों पर सालाना कम से कम 25 फीसदी का रिटर्न मिलने की संभावना व्यक्त की है और इसी आधार पर उन्होंने शेयर की कीमत 350 से 370 रुपये लगाई है।

अधिकांश बडी बीमा कंपनियां अगले साल शेयर बाजार में सूचीबध्द होने की योजना बना रही हैं।

अधिकांश बडी बीमा कंपनियां अगले साल शेयर बाजार में सूचीबध्द होने की योजना बना रहीहैं।

ऐसे में इरडा (बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण) इन कंपनियों का वैल्यूएशन तयकरने और सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की कीमत को निर्धारित करने के लिए एक समितिबना रही है। इरडा के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि समिति चार महत्वपूर्ण बिंदुओं परविचार करेगी।

पहला तो इन कंपनियों के सरप्लस को वैल्यू करने का तरीका तैयार किया जाएगा। दूसराहोगा एक्विजिशन कॉस्ट जो कमीशन खर्चे और उत्पाद पर होने वाले प्रारंभिक खर्च परआधारित होगा। तीसरा, आईपीओ में प्रारंभिक खर्चों, निवेश की गई आय, फ्यूचर मोरटैलिटीरिस्क, क्लेम रेशियो, इंश्योरेंस कंपनी के अनुभव, सरप्लस और घाटे का भी ध्यान रखाजाएगा।

इरडा के एक्चुरी सदस्य आर कन्णन ने कहा कि सरप्लस के वैल्युएशन से निवेशकों को यहजानने में मदद मिलेगी कि उसे एक प्रति शेयर आय के लिए कितना प्रीमियम अदा करनाचाहिए। यह समिति 15 से 20 दिनों में तैयार हो जाएगी और इसमें एक्चुरियल सोसायटी, चार्टेड एकाउंटेंट, इरडा सदस्य और बीमा कंपनियों के कार्यकारी शामिल होंगे।

नियमों के अनुसार एक बीमा कंपनी को दस साल के परिचालन के भीतर सूचीबध्द होनाहोता है। एसबीआई लाइफ और एचडीएफसी ने अगले साल अपने सूचीबध्द होने की घोषणाकर दी है। सबसे बड़ी निजी बीमा कंपनी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के 2010-11 में सूचीबध्दहोने की संभावना है।

बीमा कारोबार में कई सालों से कॉन्ट्रैक्ट स्पैनिंग होती है। यह इस मामले में अलग है किइसमें बिक्री के स्तर पर लागत निश्चित नहीं होती है और इनका सिर्फ सिर्फ अनुमान लगायाजा सकता है। एक दर्जन से भी ज्यादा बीमा कंपनियों में एसबीआई लाइफ ही लाभ प्राप्तकरने में सफल रही है।

इस कारोबार में ऊंची पूंजी,अच्छी ग्रोथ रेट के साथ पूंजी की भी आवश्यकता होती है जिसकानिवेश किया जा सके। लेकिन जब सरकार बीमा के प्रावधानों में फेरबदल का विचार कर रहीहै और इसमें सूचीबध्द होने की अवधि को बढ़ाना भी शामिल है। इसके बाद कई कंपनियांसूचीबध्द होने को योजना को रद्द कर सकती हैं।

Thursday, July 17, 2008

ताकि 3-जी सिग्नल आएं साफ

लंबे समय से विवाद में रहे 3जी स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर अब दूरसंचार विभाग नई योजना पर विचार कर रहा है।
इसके तहत निविदा के जरिए विभाग करीब दस ऑपरेटरों को 3जी लाइसेंस जारी करेगा, जिसमें दूरसंचार क्षेत्र में पहले से मौजूद और नए, दोनों ऑपरेटरों को शामिल किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि दूरसंचार मंत्रालय में वायलेस विशेषज्ञ 20 मेगा हट्र्ज के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम की संभावना तलाश रहे हैं, जिसे 4 अन्य ऑपरेटरों को जारी किया जा सके।सूत्रों का कहना है कि विभाग के इस कदम से 3जी स्पेक्ट्रम पर साल भर से चल रहे विवाद पर विराम लगने की संभावना है। दरअसल, दूरसंचार क्षेत्र में पहले से सक्रिय ऑपरेटर विभाग की उस योजना का विरोध कर रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि 3जी स्पेक्ट्रम आवंटन की लिए आयोजित निविदा में नए ऑपरेटरों समेत विदेशी दूरसंचार कंपनियों को भी शामिल किया जाए। पुराने ऑपरेटरों का कहना है कि पहले ही इस क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा है, ऐसे में नए व विदेशी कंपनियों को बोली में शामिल करने से लाइसेंस फीस में अनावश्क बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे सेवा उपलब्ध कराने में अधिक खर्च आएगा। उल्लेखनीय है कि दूरसंचार विभाग पहले ही 25 मेगा हट्र्ज के 3जी स्पेक्ट्रम को चिन्हित कर चुका है, जिसे नीलामी के जरिए पांच ऑपरेटरों को मुहैया कराया जाएगा। यही नहीं, इनमें से एक सरकारी नियंत्रण वाली दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के लिए रिजर्व रखने की भी बात कही जा रही है।वर्तमान में प्रत्येक सर्किल में करीब 10 से 12 ऑपरेटर मौजूद हैं। सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा, 3जी स्पेक्ट्रम आवंटन में तीन-चार नई कंपनियां भी भाग लेने का विचार कर रही है। विभाग प्राइवेट कंपनियों के लिए 3 जी स्पेक्ट्रम के 5 मेगा हट्र्ज के पांच ब्लॉकों को आवंटित करने की योजना बना रहा है। इसके अलावा, एक ब्लॉक बरएसएनएलएमटीएनएल के सुरक्षित रखने की योजना है। स्पेक्ट्रम लाइसेंस प्राप्त करने के लिए ट्राई की ओर से जो शुल्क तय किया गया है, उसे तीन कैटोगरी में बांटा गया है। ए कैटोगरी सर्किल के लिए फीस 160 करोड़ रुपये, जबकि बी कैटोगरी के लिए 80 करोड़ रुपये और सी कैटोगरी के लिए 30 करोड़ रुपये तय किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्पेक्ट्रम आवंटन से सरकार को करीब 20,000 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है। दरअसल, हर ऑपरेटरों से करीब 4,000 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क के तौर पर लिए जाएंगे।दूरसंचार ऑपरेटरों का कहना है कि लाइसेंस शुल्क के तौर पर भारी राशि चुकाने से इसका भार उपभोक्ताओं पर डाला जा सकता है। उधर, सरकार का कहना है कि ज्यादा ऑपरेटर होने से उपभोक्ताओं के पास यह विकल्प होगा कि वह अपनी पसंद के किसी भी ऑपरेटर की सेवा ले सकते हैं। वहीं एक सर्किल में ज्यादा ऑपरेटर रहने से उपभोक्ताओं को कम शुल्क में बेहतर सेवा उपलब्ध कराने की प्रतिस्पर्धा रहेगी।

Tuesday, May 6, 2008

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज जल्दी ही आईपीओ लाएगी

देश के सबसे बड़े निजी बैंक आईसीआईसीआई बैंक की इंवेस्टमेंट बैंकिंग का कारोबार करने वाली फर्म आईसीआई-सीआई सिक्योरिटीज जल्दी ही पूंजी बाजार में अपने आईपीओ के साथ उतरने जा रही है।

बैंक के सीईओ केवी कामथ के मुताबिक यह आईपीओ जल्दी ही आ जाएगा लेकिन हम किसी जल्दी में नहीं हैं। हालांकि उन्होने कहा कि आईपीओ के आकार पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है लेकिन जैसे ही बाजार के हालात सुधरेंगे हम आईपीओ ले आएंगे।

पिछली जनवरी में आईसी-आईसीआई सिक्योरिटीज के बोर्ड ने इस आईपीओ के साथ ही एक या एक से ज्यादा संस्थागत निवेशकों को शेयरों के प्राइवेट प्लेसमेंट की मंजूरी दे दी थी। इस मंजूरी के तुरंत बाद ही आईसी-आईसीआई बैंक की ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर चंदा कोचर ने कहा था कि आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के शेयर करीब छह महीनों में एक्सचेंजों में लिस्ट हो जाएंगे। बोर्ड ने अपने करीब 15 फीसदी शेयर रिटेल और संस्थागत निवेशकों को जारी करने का फैसला किया है।

61 करोड़ रुपए की इक्विटी कैपिटल वाली आईसीआईसी-आई सिक्योरिटीज रिटेल ब्रोकिंग के कारोबार की एक बड़ी फर्म है और चालू कारोबारी साल के पहले नौ महीनों में ही फर्म ने कुल 527 करोड़ रुपए का रेवन्यू अर्जित किया था और इस दौरान इसे 108 करोड़ का मुनाफा हुआ था।



अमेरिकी खौफ के साये में ईरान गैस पाइपलाइन

भले ही ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने बड़े हर्ष के साथ यह बयान दिया हो कि ईरान-पाकिस्तान-भारत (आईपीआई) गैस पाइपलाइन पर काम 45 दिन के अंदर पूरा हो जाएगा, पर भारत अब खुद इसको लेकर किसी जल्दी में नहीं है।

इसकी पुष्टि करते हुए यूपीए सरकार के पेट्र्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा कहते हैं- इस मामले पर निर्णय लेने के लिए भारत किसी जल्दबाजी में नहीं है। देवड़ा पिछले हफ्ते ही इस मामले को लेकर पाकिस्तान का दौरा कर लौटे हैं। उन्होंने बताया - गैस के वितरण का मामला अभी भी सुलझा नहीं है।

हालांकि गैस कीमतों के अलावा अब भारत के पास चिंता की और वजहें भी हैं। मसलन, ईरान और पाकिस्तान में चल रही राजनीतिक उठापटक। इसके अलावा, भारत के सामने फिक्रमंदी की सबसे बड़ी वजह है, ईरान पर अमेरिका की ओर से सैन्य कार्र्रवाई की चेतावनी। मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पहले ही ईरान पर हमले की चेतावनी दे चुके हैं, तो राष्ट्रपति पद की दावेदार हिलेरी क्लिंटन भी यही सुर अलाप रही हैं।

भारत को इस बात की चिंता है कि अगर अमेरिका पाइपलाइन परियोजना पर भी बम-बारी कर देता है तो भारत के भारी-भरकम निवेश का क्या होगा? वहीं दूसरी ओर भले ही पाकिस्तान में नई सरकार का चुनाव हो चुका है फिर भी यूपीए सरकार यह देखना चाहती है कि वहां राजनीतिक ऊंट किस करवट बैठेगा।

हालांकि देवड़ा, ने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वार्ता रोक दी जाएगी। मार्क्सवादियों के दबाव की जहां तक बात है, देवड़ा ने कहा- मार्क्सवादियों के साथ यही समस्या है।

उन्हें नहीं पता कि कहां रेखा खींचनी है। अगर हम निवेश कर देते हैं और उसके बाद ईरान में कुछ हो जाता है तो क्या ए.के. गोपालन भवन (मार्क्सवादी पार्टी का मुख्यालय) इसकी भरपाई करेगा?

मार्क्सवादियों के साथ यही समस्या है। उन्हें नहीं पता कि कहां रेखा खींचनी है। अगर हम निवेश कर देते हैं और उसके बाद ईरान में कुछ हो जाता है तो क्या ए.के. गोपालन भवन (मार्क्सवादी पार्टी का मुख्यालय) इसकी भरपाई करेगा? - मुरली देवड़ा, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री